Sunday, December 4, 2016

मेरे ही जैसी या यूं कहूँ मेरी ही कौम की उन जाबांज़ नारियों की कहानियां जिन्होंने इस देश के वीरों का आँगन सवांरा है। उनके सफर को मैंने बहुत करीब से देखा है। एक सैनिक तो सिर्फ सीमा पर जंग लड़ता है लेकिन इन वीरांगनाओं को मैंने हर कदम पर एक नई जंग लड़ते हुए देखा है , न  जाने कितनी  मुश्किलों का सामना करते हुए एक विजयी मुस्कान के साथ अपने और अपने परिवार को सँभालते हुए देखा है। इन्हें कभी कोई वीरता पुरुस्कार नहीं मिलेगा और इन्हें शायद उसकी जरूरत भी नहीं। एक फौजी की अर्धांगिनी होने का गर्व है उन्हें और यही उनके लिए काफी है।  बहुत कुछ सच और कुछ कल्पना से रंगी हुई  कहानियाँ, उस दुनिया से  जो आपकी दुनिया से अलग है। इन वीरांगनाओं के अदम्य साहस  त्याग और बलिदान को समर्पित मेरा छोटा सा प्रयास।